माओं के लिये स्तनपान से संबंधित जानकारियां।

स्तनपान कराते समय यदि कुछ बातों का ध्यान रखें तो आप भी स्तनपान का एक बेहद प्यारा अनुभव प्राप्त कर सकतीं हैं।

स्तनपान मातृत्व का एक ऐसा सुख है जो एक माँ और शिशु को एक अटूट और बहुत ही प्यारे बंधन में बांध देता है। प्रारंभ में कुछ मुश्किलें आती हैं लेकिन कुछ ही दिनों के लिए… पर इसका मतलब यह नहीं अपने शिशु को स्तनपान ही न करायें! स्तनपान को लेकर बहुत से मिथ्य हैं जैसे, आपके स्तनों का आकार बढ़ जाएगा, आपका शरीर खराब हो जाएगा परंतु ऐसा कुछ भी नहीं है।

मां का दूध एक संपूर्ण आहार है। प्रारंभ में जो दूध निर्मित होता है, वह कोलोस्ट्रम कहलाता है। कोलोस्ट्रम ऐसे पोषकों तथा एंटीबॉडीज़ से समृद्ध होता है, जो आपके शिशु की संक्रमणों तथा रोगों से रक्षा करते हैं।

बच्चे को स्तनपान कराने से उसका मानसिक व शारीरिक विकास होता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है, कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों से बचाव होता है। जिन शिशुओं को जन्म से स्तनपान कराया जाता है, उनकी जीवन के पहले वर्ष में बीमार पड़ने की संभावना बहुत कम होती है।

स्तनपान कराने वाली माओं को भी इससे बहुत लाभ होता है। स्तनपान कराने वाली माओं को स्तन या गर्भाशय के कैंसर का खतरा न्यूनतम होता है। स्तनपान कराने से वजन भी नियंत्रण में रहता है।

स्तनपान कराते समय यदि कुछ बातों का ध्यान रखें तो आप भी स्तनपान का एक बेहद प्यारा अनुभव प्राप्त कर सकतीं हैं।

स्तनपान कराने वाली मां को पौष्टिक आहार लेना ज़रुरी है क्योंकि माँ के दूध से ही शिशू को पोषक तत्व मिलते हैं। चाय, काॅफी व तैलिये भोजन से परहेज़ करें। साथ ही शरीर में ऊर्जा व स्फूर्ती बनाये रखने के लिये भी, संतुलित व पौष्टिक आहार लें।

स्तनपान कम से कम छः माह तक और अधिक से अधिक एक वर्ष तक जारी रखें। उससे अधिक भी रख सकते हैं। यह आपकी व्यक्तिगत स्थिति और स्तनपान को लेकर आपकी सोच पर निर्भर करता है।

स्तनपान कराते समय धैर्य व अभ्यास की आवश्यक्ता होती है। कई बार बच्चा स्तनपान ठीक तरह से नही कर पाता। इसमें एक दिन से एक सप्ताह भी लग सकता है। इसलिये स्तनपान को ज़्यादा से ज़्यादा समय दें।

स्तनपान कराते समय आरामदायक स्थिति में बैठें। अपने बच्चे को इस तरह पकड़ें, जिससे आपकी बाँहों और पीठ में दर्द न हो। शिशु को सहारा देने के लिए गद्दियां या तकिये पास रखें। हो सके तो पैरों के नीचे आराम देने के लिये स्टूल भी रख सकतीं हैं।

एक स्तन से पिलाने के बाद भी यदि बच्चा भूखा हो तो दूसरे स्तन से भी पिलायें।

स्तनपान कराते समय यह ध्यान रखें कि शांत स्थल हो। आसपास कोई शोर या आवाज़ न हो। इससे बच्चे का ध्यान हटने से वह दूध पीना छोड़ देता है और भूखा रह जाता है।

सार्वजनिक स्थान पर यदि दूध पिलाना हो तो भी किसी शांत स्थल का चुनाव करें। किसी भी तरह की शर्म या संकोच न करें शिशु जब भूखा हो, तो उसे स्तनपान करवाना आपकी पहली प्राथमिकता है। यदि फिर भी असहजता महसूस हो तो स्कार्फ, डुपट्टा इत्यादि का प्रयोग ढकने के लिये करें। केवल यह ध्यान रखें कि बच्चे को अधिक गर्मी न लगे और वह आराम से सांस ले सके।

स्तनपान कराने के बाद बच्चे को डकार ज़रुर दिलवायें, अन्यथा दूध पचता नही, छाती पर ही जम जाता है और इससे दूध बाहर निकल जाता है।

स्तनपान के समय आरामदायक नर्सिंग ब्रा का उपयोग करें। इससे आपके स्तनों को उचित सहारा मिलेगा। इनमें हुक या जिप लगी होती है, जिनको आप स्तनपान करवाते समय आसानी से खोल सकतीं हैं। कई बार स्तनों से अत्यधिक दुग्धस्राव होता है जिससे ब्रा गीली हो जाती है, इसके लिये आप ब्रेस्ट पैड खरीद सकतीं हैं।

स्तनों को हमेशा साफ रखें। साफ पानी से अच्छी तरह धोयें। दूध पिलाने से पहले व बाद में साफ गीले कपड़े से साफ करें।

स्तनपान आपके और आपके शिशु के बीच के संबंध को और मजबूत करता है और प्रसवोत्तर अवसाद से बचने में मदद करता है। स्तनपान आपको व्यस्त दिनचर्या से नियमित फुरसत लेने का मौका देता है। अपने शिशु को बढ़ते और विकसित होते हुए देखकर एक असीम शांति व खुशी मिलती है। इस एहसास से अपने आपको वंचित न रखें।

स्तनपान की जागरूकता के लिए विश्व भर में एक अगस्त से विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। इसके लिये भारत सहित पूरे विश्व में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अतः अपने आस पास सभी माओं के साथ ये जानकारियां साझा करे और उनके परिवारों को भी जागरुक करें।

#विश्व स्तनपान सप्ताह।

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