ज़िद्दी बच्चों को कैसे संभाले?

ज़िद्दी बच्चों को कैसे संभाले?

कल मेरी सहेली टिया और मैं बहुत दिनों के बाद शाॅपिंग के लिए गए थे। सारा दिन मस्ती करने की योजना थी परन्तु माॅल में जाते ही टिया की चार साल की बेटी चाहत ने जिद्द करना शुरू कर दिया। सबसे पहले तो खिलौनों की दुकान के सामने खड़ी हो गई। कभी कोई खिलौना पसंद करती फिर अगले ही पल दूसरा खिलौना चुनती। काफी मशक्कत के बाद उसने एक गुड़िया ली। हम आगे ही बढ़े थे कि उसने आइसक्रीम खाने की जिद्द की। उसे ठंड लगी थी तो टिया ने आइसक्रीम दिलाने से मना कर दिया। वो जोर जोर से चीखने लगी। टिया ने उसे जोर का चांटा मारा तो वो ज़मीन में लेट गई। रोते-रोते उसकी हिचकियां बंध गई थी। टिया गोद में लेने लगी तो उसने टिया के बाल खिंचना शुरू कर दिया। अंत में थक हार कर टिया ने उसे आइसक्रीम दिला दी। अब तक हमारा मूड खराब हो चुका था तो मैंने उसे मेरे घर चलने को कहा।

टिया रास्ते भर चाहत से मेरे बेटे की तुलना करती रही। घर पहुंचते ही मैंने दोनों बच्चों को खाना खिलाकर दूसरे कमरे में खेलने को कहा। टिया अभी भी परेशान थी। “शुभा तेरा बेटा भी तो चाहत की उम्र का है पर वो तो ऐसा नहीं है ये सब तरूण की गलती है। वो ही चाहत की हर जिद्द पूरी करता है।”

मैंने कहा,”टिया तेरी भी गलती कम नहीं है। हमारी गलतियों की वजह से ही बच्चें ज़िद्दी बनते हैं। तुम दोनों ने शुरू से ही उसकी हर मांँग मानी है। ना उसने सुना ही नहीं। अब धीरे-धीरे उसकी मांगे बढ़ती जा रही है तो तुम्हें परेशानी हो रही है।”

“तो फिर मैं क्या करूं??”

“टिया सबसे पहले तो हमें यह समझना चाहिए कि जिंदगी में हम जो भी चाहते हैं वो सारी चीज़ें हमें कभी नहीं मिल सकती इसलिए जरुरी है कि हम बच्चों को शुरू से ही यही सीख दे, नहीं तो बड़े होने पर जब कोई चीज़ उनके मन मुताबिक नहीं होगी तो वह उनके दुःख का कारण बनेगी।

माता पिता अपने बच्चों को हर सुख सुविधा देना चाहते हैं। उनको ‘ना’ कहना बहुत मुश्किल है पर हर समय उनकी माँंगों को मानना सही नहीं।

बच्चें हमेशा अपने माता-पिता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं। जोर जोर से चीखने, रोने , खाना न खाकर या जमीन पर लोट कर वो अपनी बात मनवाना चाहते हैं।

मैं तुम्हें इसके लिए कुछ उपाय बताती हूँ।

जिद् कम करने के लिए क्या करें?

१- बच्चों को डांटना या मारना इसका उपाय बिल्कुल भी नहीं है।
२- ज़िद्दी बच्चों के साथ धैर्य रखना बहुत जरूरी है।
३- दृढ़ता से अपनी बात कहिए। दो तीन बार जब उनकी बात नहीं मानेंगे तो जिद्द अपने आप ही कम होती जाएगी।
४- बच्चा रोकर अपनी बात मनवाने की कोशिश करता है। उसे नजरअंदाज किजिए।
५- एक बजट बनाइए कि हफ्ते में या महिने में इतना खर्च ही कर सकते हैं। बजट के बारे में बच्चे को भी बताएं परन्तु उन्हें पैसों के बारे में न बताकर खिलौनों की संख्या के बारे में बताएं या खाने की चीजों के बारे में बताएं।
६- बाहर जाने से पहले बताएं कि खिलौना लेना है या मनपसंद खाना खाना है। कोई एक चीज ही मिल सकती है।
७- प्रोत्साहित करने में कंजूसी न करें जैसे अगर बच्चा बाहर जाकर जिद्द नहीं करता तो अगली बार उसकी मनपसंद चीज दिलवाइए।

यदि बच्चा बात नहीं मान रहा है तो क्या करें?

१- बच्चे को कभी भी डांटना या मारना नहीं चाहिए।
२- दंड स्वरूप आप उससे बात करना कम कर दिजिए। ३- उसके साथ खेलना कम कर दिजिए।
४- उसकी बातों पर ठंडी प्रतिक्रिया करें।
इससे बच्चे को लगेगा कि माता या पिता मुझसे नाराज़ हैं। मैंने गलती की है।

क्या नहीं करें-

१- कभी भी बच्चों की समालोचना न करें। किसी के साथ तुलना करने से धीरे धीरे बच्चे में हीन भावना आ जाती है।
२- झूठा डर मत दिखाइए। जैसे कि अगर तुमने बात नहीं मानी तो मैं तुम्हें घर से निकल दूंगी या खाना नहीं दूंगी, क्योंकि जब आप अपनी बात पर कायम नहीं रहेंगे तो बच्चे का डर कम हो जाएगा।
३- बच्चे को डांटने मारने के बाद कई बार माता पिता में पछतावा होता है और बाद में आप उसे उसकी मनपसंद चीज दिलाते हैं तो बच्चे को यही लगता है कि मैंने कोई ग़लत काम नहीं किया है। ऐसा बिल्कुल नहीं करें।

जिद्दी बच्चों को थोड़ा धीरज से संभालोगी तो चाहत में बदलाव अवश्य नज़र आयेंगे। तुम्हारा आज का आचरण तुम्हारे बच्चे का भविष्य संवारेगा।

टिया ने कहा,”धन्यवाद सखी, मैं आज से चाहत के साथ ऐसे ही पेश आउंगी।

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Soma Sur

A mother of two lovely boys. An educationists by profession. An artist by nature. Always interested in creative side of everything. Reading is my passion and writing is my expression.
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