मेरे सपने

मेरे सपने

दूसरे माले की वो खिड़की जब खुलती थी और मैं बाहर झाँकती तो आसमान का एक छोटा सा टुकड़ा भर नजर आता था जो सपने दिखाता सा लगता था कि एक छोटा सा ही सही अपना भी एक आसमान हो जहाँ मैं अपने पंख फैला सकूँ उड़ सकूँ, ना कोई रोके-टोके मुझे…

और वो आसमान था लेखन का आसमान, जहाँ ध्रुव तारा नहीं बल्कि एक छोटा सा सितारा बनकर भी मैं तो खुश हो जाऊँ…जब भी बादलों को देखती तो एक टुकड़ा तोड़कर हाथ में रखने  का मन करता, बारिश की नन्हीं बूँदों को छूकर नाच लूँ जी करता, वो बड़ा सा पेड़ जो दोपहर में अकेला सा लगता है और जहाँ शाम ढ़लते ही इसके साये तले मेला लगता है। पंछियों को घर लौटते देखना ना जाने क्यों भला लगता।

नजारे थोड़े थोड़े टुकड़े टुकड़े में देखना अच्छा लगता, खिलखिलाते बच्चे, काम पर जाते-लौटते लोग भी अच्छे लगते, खिड़की छोटी, पर ख्वाबों का बड़ा आसमान मन में पलता, पर जिम्मेदारियां कहतीं घर, बच्चे को मेरी जरूरत है फिर अपने सपनों को भूल कर जुट जाती उन जिम्मेदारियों को पूरा करने….मन मेरा घर में भी रमता था,शिकायत भी कोई नहीं थी…सपने तो देखती पर पूरे करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी।

पर एक खालीपन सा तो था ही मेरे मन में, फिर एक दिन घर पर ही जब यूँ ही फेसबुक पर कुछ देख रही थी तब मेरे सामने आयी एक ऐसी साइट जिस पर मॉम्स अपने विचार ब्लॉग्स के द्वारा लिख सकती थी. पर उस दिन भी कुछ लिखने की हिम्मत नहीं पड़ी जबकि मन में विचारों का जमावड़ा लगा था।

पर फिर एक दिन मेरी बेटी के एक जवाब ने मुझे लिखने पर मजबूर कर दिया और उसके लिए तो मेरी बिटिया रानी तुमको दिल से बड़ा वाला शुक्रिया, गर्व से कहती हूँ तुम्हारी वजह से ये लिखने का सुहाना सफर शुरू हुआ।
उस दिन इम्तिहान में एक ऐस्से( essay)में रोल मॉडल पर निबंध लिखने पर मेरी जगह उसने जे. के रौलिंग का नाम लिखा, मेरा दिल टूट गया, फिर सोचा कि रोल मॉडल तो वो होते हैं जिन्होंने अपने जीवन में कुछ हासिल किया हो, उनकी कुछ उपलब्धियां हों तब तो कोई उन्हें रोल मॉडल जैसा मानेगा। मैंने अपने खुद की पहचान कहाँ बनाई है?

बस कहते हैं ना कि कभी-कभी दिल पर चोट लगे तो अच्छा हो जाता है आप पूरी शिद्दत से जुट जाते हैं… रास्ते भी निकल आते हैं, हिम्मत भी आ जाती है, और आप सब कुछ मैनेज भी कर लेते हैं।

और फिर वो दिन भी आया जब मैंने अपना पहला ब्लॉग ‘मेरी प्यारी बेटी’ लिखा, और इतना प्यार, इतनी सराहना मिली मुझे अपने रीडर्स से, उनके प्यारे कमैंट्स ने मुझे और भी अच्छा लिखने की प्रेरणा दी और मुझे एक नई पहचान मिली ‘ब्लॉगर’…मेरे नाम के आगे लिखा ‘ब्लॉगर’ एक ऐसी उपलब्धि थी जिसे पाने का सिर्फ ख्वाब ही देखा था और इसलिए पूरा होने की पहली सीढ़ी पर ही जो प्रोत्साहन और नाम मिला जिस पर विश्वास करना कठिन था।

सफर शुरू हुआ और फिर ऐसे ही नन्हे-नन्हे कदमों से चलते मंजिल पास लगने लगी और फिर मैं कहीं रूकी नहीं। छोटे-बड़े ब्लॉग, कहानियाँ, कविताएँ, कोट्स कई वैबसाईट्स पर लिखे, फिर कुछ कहानियाँँ अखबारों में छपी।

फिर मैंने Mompreneur Circle में 100words stories लिखनी शुरू कीं ये मेरे लिए नया अनुभव था पर सफलता मिली और इनको लिखने में पारंगत होती गई और फिर तो #MompreneurCircle कम्युनिटी की तरफ से most loved blogger 2018 का टाइटल मिला कम्युनिटी बैनर पर मेरी फोटो थी और आँखों में खुशी के आँसू थे कि शायद इस सफर के एक और पड़ाव को पार कर लिया था मैंने। हमेशा इस अमेजिंग कम्युनिटी की शुक्रगुजार रहूगी जहाँ  महिलाओं को इतना बढ़ावा तो मिलता ही है साथ में डिजर्विंग महिलाओं को सम्मानित भी किया जाता है। कम्युनिटी और खासतौर पर लतिका वाधवा जी को और साथ में पूरी टीम को बधाई हो, ऐसे ही बढ़िया काम करते रहिए।

फिर जनवरी के लिए टॉप ब्लॉगर का टाइटल मुझे फिर से मिला और आत्मविश्वास बढ़ता गया। कुछ और अवार्ड्स और सर्टिफिकेट्स भी मिले।

अब मैं दो बुक्स भी लिख चुकी हूँ जो एमेजॉन किंडल पर हिंदी एडिशन में अवेलेबल हैं…

जिनमें से पहली एक रोमांटिक कहानी है ‘अंबर-अवनि‘, जिसमें अवनि और अंबर के जीवन के प्यार, समाज के बंधनों और दोनों के जीवन के उतार-चढ़ाव को मैंने कहानी के रूप में बुना है….तो क्या जीवन की सभी परीक्षाओं को अवनि- अंबर पार कर सके? क्या वो दोनों कभी मिल सके ? अगर आप जानना चाहें तो आप मेरी ई-बुक पढ़ सकते हैं किंडल अनलिमिटेड(Kindle Unlimited Or Kindle app) पर भी पढ़ सकते हैं।

मेरी दूसरी ई-बुक है,  ‘कुछ ख्याल बस यूँ ही-मेरी रचनाओं का संकलन‘, जिसमें मेरी कविताओं का संग्रह है साथ ही कुछ शार्ट स्टोरीज भी हैं… तो अगर आप कविताओं के शौकीन हैं तो आपको ये ई-बुक जरूर पसंद आएगी। मेरी ये दोनों ही

ईबुक्स गुडरीड्स (goodreads) जैसी नामी रिव्यू वैबसाइट पर लिस्टेड हैं और काफी अच्छी रेटिंग्स के साथ लिस्टेड हैं।

जितनी अपेक्षा भी नहीं की थी उससे बढ़कर रीडर्स का प्यार मिला और मुझमें आत्मविश्वास भी बढ़ा है। मेरे पति और घर- परिवार में सभी बेहद खुश हैं और मेरी बेटी वो अब सबसे बेहद चहककर  बोलती है मेरी मम्मा ‘Published Author’ है और मैं भी बहुत खुश हूँ अपनी इस नई पहचान से।

पिछले दो साल यूँ ख्वाबों जैसे ही निकले जिनमें कभी कभी निराशा के भँवर में डूबी जब लोगों ने कहा ‘लिखने का क्या फायदा? अब क्यों कुछ नया शुरू करने की तुमको जरूरत है?’

फिर जब कुछ उपलब्धियां मिली तो ये सुनने को मिला ‘बहुत ज्यादा तेज दौड़ रही हो कहीं मुँह के बल ना गिर जाना।’

फिर भी उस भँवर से मैं उबरी भी क्योंकि ये समझ गई थी कि कुछ भी हो अच्छा करूँ या गलत, लोगों ने कुछ तो बोलना ही है और मुझे अब खुद को साबित करना ही होगा और इसमें मेरी मदद और मेरा साथ मेरे अलावा और कोई नहीं दे सकता बस ठान लिया और अब थोड़े और बड़े ख्वाब देखने लगी हूँ  थोड़ी और बड़ी पहचान बनाने की राह पर जो चल पड़ी हूँ। उम्मीद करती हूँ ये सफर जारी रखते हुए अपने लिए नए आयाम बना सकूंगी और सपने देखना तो अब कभी नहीं छोडूंगी। सफर तो अभी शुरू ही हुआ है और जारी ही रहेगा।

saksena.smita@gmail.com'

Smita Saksena

मेरा नाम स्मिता सक्सेना है और मैं बैंगलौर में रहती हूँ। मैं लगभग दो साल से हिंदी में  ब्लॉग्स ,कहानियां, कविता  और कोट्स इत्यादि कई वैबसाइट्स और अखबार में  लिखती हूँ जिनमें से मॉम्सप्रैसो(लगभग 80 ब्लॉग्स, कहानियां), Mompreneur Circle( won most loved blogger of 2018(on the banner as face of community) 100words stories,  January top blogger 2019) , फर्स्ट क्राई(पैरेंटिंग ब्लॉग), राजस्थान पत्रिका(सोशल इश्यूज), प्रतिलिपी,पैरेंट्यून, दिबीचक्रा प्रमुख हैं।